Friday ,15th December 2017

मिले होने की चर्चा... कौन किससे मिला है?

- रविकांत कौशिक

छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2003 से भाजपा की सरकार बनने के बाद कुछ समय के बाद से कांग्रेस में यह नारा चल रहा है कि कांग्रेस को कांग्रेसी ही हराते हैं। कांग्रेस को कोई दूसरा नहीं हरा सकता। इसके लिए कांगे्रस में ही लोग कांग्रेसी के सत्ताधारी दल के लोगों के साथ मिले होने की बात करते हैं। मिले होने की बात को लेकर और सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाने को लेकर वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कभी 2008 के चुनाव में 12 सीटों पर कांग्रेस की हार के लिए अजीत जोगी को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ लिखित शिकायत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से की थी। अंतागढ़ टेप कांड के समय भी कांग्रेस के एक पक्ष के लोगों ने अजीत जोगी उनके पुत्र एवं मुख्यमंत्री तथा सत्ताधारी दल के साथ कुछ लोगों  के सांठगांठ को लेकर खूब चर्चा की। पिछले विधानसभा चुनाव एवं नगर निगम चुनाव के समय विधायक प्रत्याशी एवं महापौर प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के लोगों के हराने को लेकर स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर तक कांग्रेस के लोगों के फूल छॉप कांग्रेस होने की चर्चा खूब रही है। अभी-अभी रथयात्रा के समय अप्रत्याशित रूप से लोगों ने जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा के दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल सरकार के मंत्री तथा सरकरी दल के निगम के अध्यक्ष व मंदिर के प्रमुख आयोजकों के साथ देखकर लोगों ने चर्चा शुरू कर दी। और खबरीलालों ने भी इस विषय को खबरों को लेकर चर्चा शुरू कर दी। इसी बीच माह के अंतिम दिनों में जैसे ही लगभग दो दशकों से संघर्ष में चल रहे अजीत जोगी की जाति को लेकर काफी जद्दोजहद के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के लगभग साढ़े 6 साल बाद बहुचर्चित जाति मामले का फैसला आया। और फिर राजनीतिक गलियारे से लेकर खबरीलालों के बीच आरोप और जुमलो पर चर्चा शुरू हो गई। राजनीति में एक विषय गूंज रही है कि हाईपावर कमेटी के फैसले के बाद कांग्रेस व भाजपा के नताओं को क्या हो गया कि वे हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट उजागर होने के बादकूद-कूद कर बयान देने वाले लोग इस मामले में चुप्पी साधने लग गए। भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रवक्ताओं को दिशा-निर्देश जारी कर दी। कांग्रेस ने भी अंदर से चुप्पी साधना उचित समझ लिया। उसके बाद क्या था आरोप शुरू हो गए। उसी से यह सवाल उठा रहा है कि वास्तव में कौन किससे मिला है। कांग्रेस के लोग जोगी और जोगी कांग्रेस को भाजपा और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मिले होने और उनकी बी टीम का आरोप लगाते हैं। जाति के फैसले आने के बाद अमित जोगी एवं छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के लोगों ने और कुछ खबरीलालों ने इस प्रकार चर्चा शुरू की इसमें भूपेश बघेल और रमन सिंह के बीच किसी सांठगांठ का यह नतीजा करार दिया। जो बहुतो को हजम नहीं हो रही है। कुल मिलाकर प्रदेश कांग्रेस सरकार और जोगी कांग्रेस के बीच आपस में कौन कितना किससे मिला हुआ है ये वे ही बेहतर बताएंगे पर इस विषय पर बहुत चर्चा हो रही है। उधर कुछ लोगों के बीच अभी भी इस फैसले के पूर्व सत्ताधारी दल और अजीत जोगी परिवार के बीच में फैसले को लेकर कुछ बातचीत पूर्व में होने की चर्चा भी है। इन्हीं सब चीजों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिर  मिले हुए हैं तो कौन किससे मिला है ये बड़ी चर्चा है। 
पुराने प्रकरणों का क्या हो रहा है...!


ईओडब्लू एसीबी पिछले कुछ समय से प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले में छापा मारने में अच्छी कार्रवाई कर रहे हैं। अभी-अभी एक सरकार को चूना लगाने वाले षडय़ंत्र का खुलासा कर एक बार फिर सिंचाई विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया। विभाग पिछले कुछ समय से षडय़ंत्रकारी गिरोह के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। परंतु पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के मामले में जीरोटालरेंस के नाम पर नारा आने के बाद कुछ भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में शासन के स्तर एवं जांच एजेंसी स्वंय के द्वारा हीला हवाला किया जा रहा है। जिसको लेकर अब चर्चा हो रही है कि ईओडब्लू एसीबी, आईएएस आइएफएस के खिलाफ कार्रवाई के मामले में अपनी शक्ति का उपयोग अपेक्षित गति से क्यों नहीं कर रही है। लगभग एक साल होने जा रहे हैं नान घोटाले प्रकरण में छापे के बाद दो आईएएस अधिकारी के खिलाफ भारत सरकार से अभियोजन के अनुमति के बाद भी क्यूं कार्रवाई लंंबित है। एक अन्य आईएएस अफसर रणवीर शर्मा के मामले पर आखिर क्या हुआ। पिछले कुछ समय से अभियोजन की स्वीकृति का प्रस्ताव शासन के पास लंबित पड़े हुए हैं। शासन आखिर अभियोजन चलाने की अनुमति देने में देरी क्यूं कर रही है। बहुत से विषय है बहुत सी प्रक्रिया होती है पर जब कोई बात आ जाए तो चर्चा जरूर होती है। तीन आईएफएस अधिकारी के भी प्रकरण सुर्खियों में आए पर कार्रवाई क्या हो रही है इसका अतापता नहीं है। जिसकी चर्चा इन दिनो राजनीति एवं प्रशासनिक गलियारे में खूब होती है। फिर लोग चटकारे लगाते हुए कहते हैं वादे करना और नारे लगाना अब फैशन एवं जुमला हो गया है। अब आप फैशन और जुमले पर न जाए तब आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा अन्य व्यर्थ की चिंतन में कुछ नहीं होने वाला। परिणाम मूलक कुछ हो वहां आप चिंता करें तो आपकी चिंता जायज होगी। नहीं तो फिर कई कहावते और मुहावरे इन महान क्रांतिकारियों, कर्मवीरों के लिए जो आज की व्यवस्था के संचालक है उन पर सटीक बैठती है। कुल मिलाकर एक बार फिर ईओडब्लू एसीबी की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक एवं प्रशासनिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि छोटे लोग तो जेल में है आईएएस, आईएफएस के खिलाफ आपेक्षित कार्रवाई क्यूं नहीं?

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