Friday ,15th December 2017

राजधानी को जरूरत है फ्लाईओवर-मेट्रों की...बन रहा पैदल चलने का यंत्र 'स्काईवॉक

  • करोड़ों का वारा-न्यारा, उजड़ रही हरियाली, पसीना बहा रहे लोग

रायपुर। राजधानी रायपुर में अगर हम विकास कार्यों की बात करे तो इसमे कोई दो मत नहीं कि राजधानी में विकास कार्य बहुत तेजी के साथ हुआ हैं। विकास कार्यों में रायपुर ने अपने एक अलग पहचान बनाई है वही दूसरी ओर इस बात को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता कि विकास के मामले में हम कुछ ज्यादा ही ओवर कान्फिडेंस हो गए हैं। विकास के नाम पर बिना सोचे समझे ऐसे भी कार्य किए जा रहे हैं जिसकी वास्तव में जरूरत नहीं है।ऐसे विकास कार्यो पर किए जाने वाले पैसों का अपव्यय वास्तविक जरूरतों पर किया जाए तो यह आवश्यकता के दृष्टिकोण से मिशाल साबित होगी। उसका असर भी राजधानी की चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, जाम की स्थिति से छुटकारा जैसी कई समस्याओं के निदान में देखने को मिलेगा।  विधानसभा चुनाव के पहले सरकार ने मेट्रो या फ्लाईओवर की ढेर सारी योजनाएं तैयार की थी। उनमे से बहुत ही कम योजनाएं शुरू की। यहां सबसे पहले सवाल यह उठ रहा है कि क्या रायपुर में करोड़ों की लागत से शास्त्री चौक से जयस्तंभ चौक की ओर तथा यहीं से जेल रोड की ओर बनने वाला स्काईवॉक जरूरी है? या फ्लाईओवर अथवा मेट्रो? रायपुरवासी छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से ही यह आस लगाए बैठे थे कि उन्हें रायपुर में नया रायपुर की तर्ज पर एक सुंदर शहर प्राप्त होगा। लेकिन नया रायपुर बनने से उनकी आशाओं में तो पानी फिर गया। और वर्तमान शहर को भी उससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। रायपुर से कई किलोमीटर दूर बनाया गया नया रायपुर शहर सिर्फ एक 'म्यूजियमÓ बनकर रह गया है जिसे देखने के लिए लोग जाते हैं और घूमकर चले आते हैं। वह भी वे लोग जिनके पास चार चक्के की गाडिय़ां है, वही कुछ युवकों के लिए नया रायपुर सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह गया है। दूसरी ओर रायपुर में विकास कार्य जहां कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया है।  कुछ क्षेत्र जहा निर्माण कार्य हो रहे हैं उन पर भी ऊंगलियां उठ रही है। राजधानी के ऐतिहासिक बूढ़ातालाब का ठेका, बाहरी कंपनी को देकर जहां करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं वहीं तेलीबांधा में सौंदीर्यीकरण शहर की जरूरत है लेकिन अब इसपर और अधिक व्यय को क्या कहें. करोड़ों रुपए का अपव्यय सामने आने लगा है। इन सबमें सबसे संगीन मामला रायपुर में स्काईवॉक के निर्माण का है जो अचानक ही उठ खड़ा हुआ और देखते ही देखते रायपुर की एक विकसित सड़क और उस पर विभाजित हरियाली को  बर्बाद कर दिया गया। साथ ही बिना किसी सूचना व सलाह मशविरे के स्काईवॉक का निर्माण शुरू कर दिया गया। अब प्रश्न यह भी उठ रहा है कि आज की भागती दुनिया में कितने ऐसे लोग बचे होंगे जिनके लिए स्काईवॉक की जरूरत है। क्या यह आगे चलकर एक शो पीस की तरह नहीं रह जायेगा? इस स्काईवॉक का निर्माण  सिर्फ पैदल चलने के लिए किया गया है लोग  इस पर पैदल ही चल सकते हैं।  पुराने बस स्टैड़ से शास्त्री चौक और शास्9ी चौक से घडी चौक  तक तथा इधर जेल रोड तक  बनाए जा रहे इस स्काईवॉक का जो स्वरूप वीडियो व फोटो में दिख रहा है उसके अनुसार अगर यह बन भी गया तो इसकी कार्यावधि व मेटेनेंस किस प्रकार की होगी यह रायपुर के अधिकांश बड़े बिल्डिंगों में जहां लोग पान गुटखा खाकर थूक देते हैं उसको देखकर की  जा सकती है अभी लोग सड़क पर चलते चलते थूकते  हैं अब आसमान से थूकना भी शुरू कर देंगें! 

 

 

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