Friday ,15th December 2017

शोर शराबे के बीच विपक्ष का कामरोको प्रस्ताव खारिज

पक्ष-विपक्ष ने कई तर्क रखे


रायपुर(प्रखर)। विपक्ष का कामरोको प्रस्ताव खारिज, विपक्ष ने किया नारेबाजी, समाचार लिखे जाने के समय तक सदन में नारेबाजी जारी थी। कांग्रेस के सदस्यों के द्वारा लाए गए कामरोको प्रस्ताव पर सुबह से सवा तीन बजे तक नारेबाजी का दौर रहा। आज सदन की कार्यवाही जब तीसरी बार शुरु हुई तब विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि हमने जो पूर्व में मुद्दा उठाया है उसका क्या? उस पर चर्चा होनी चाहिए। भाजपा की ओर से शिवरतन शर्मा ने आपत्ति की और कहा कि मैंने जो व्यवस्था का प्रश्न उठाया था उस पर जवाब आना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो मुद्दा न्यायालय में है और जिस विषय पर न्यायालय संज्ञान ले रहा है उस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे ने कहा कि विपक्ष ने जिस मुद्दे पर प्रस्ताव लाया था उस मुद्दे पर व सोर शराबा कर के गर्भगृह में पहुंचा, निलंबित हो गया तो उसके बाद अब क्या मुद्दा रहता है अब क्यों चर्चा हो? वरिष्ठ
 विधायक भूपेश बघेल ने कहा कि जो विषय चल रहा है उस पर बात तो होगी जब तक व्यवस्था नहीं आएगी तब तक वह विषय तो रहेगा। हमारा निलंबन वापस हुआ है। हम वापस आकर पुन: उक्त स्थगन प्रस्ताव को उठा रहे हैं। मंत्री अजय चंद्राकर ने विपक्ष की ओर मुखातिब होकर सवाल उठाया कि आप कामरोको प्रस्ताव लाए हैं। अपने प्रस्ताव में सरकार के वरिष्ठ प्रभावशाली मंत्री शब्द का उपयोग किया है। माननीय मंत्री का नाम नहीं लिखा है। क्या आपने माननीय मंत्री को भी सूचना दी है ताकि मंत्री का जवाब पेश हो सके। अजय चंद्राकर ने यह भी कहा कि विपक्ष का यह आरोप आरोप पोल कल्पित है। उस पर कोई तथ्य ही नहीं है। इसलिए इस विषय पर क्यों कोई चर्चा हो। आसंदी ने भोजन अवकाश के पूर्व कहा कि कोई भी राजस्व न्यायालय से संबंधित मुद्दे पर सदन उसको सुन सकता है, उसकी रोक नहीं है। जहां तक विषय के जीवित होने व समाप्त होने का प्रश्न है तो जब तक हमारी व्यवस्था नहीं आ जाती तब तक विषय खत्म नहीं हो जाता। धनेन्द्र साहू ने आसंदी के उक्त कथन के बाद फिर उस मुद्दे को उठाया और सोर शराबे के बीच भोजन अवकाश की घोषणा हो गई। तीन बजे जब सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो विपक्ष के सदस्यों ने फिर अपने कामरोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की और अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने अपनी व्यवस्था देते हुए कहा कि आप जिस विषय पर गर्भगृह में पहुंचकर निलंबित हो चुके है अब उसका विषय यूंही समाप्त हो गया और मैंने इस विषय को आग्राय कर दिया है। फिर क्या था विपक्ष के सदस्य मंत्री के खिलाफ लाए गए अपने कामरोको प्रस्ताव को लेकर आवाज बुलंद करते रहे। नारा आया गोरे लोगों को भगाए हैं, भ्रष्टाचारियों को हटाना है, जमीन का भ्रष्टाचार बंद हो, जमीन घोटालों की जांच हो, आदिवासियों किसानों की जमीन हड़पना बंद करो, मुख्यमंत्री शर्म करो के नारे गूंजीत हुए। सत्ता पक्ष के ओर से मंत्री अजय चंद्राकर एवं प्रेमप्रकाश पांडे ने विपक्ष के कामरोको प्रस्ताव को लेकर जिस प्रकार बात रखी और कहा कि उक्त मंत्री का नाम भी आरोप पत्र में नहीं है। 

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