एड्स के बारे में नहीं जानती 19 प्रतिशत महिलाएं, वर्चुअल एड्स जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की 19 फीसदी महिलाओं ने कभी एड्स के बारे में सुना तक नहीं है। एनएफएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में एड्स जागरूकता के मामले मे 81 फीसद से अधिक महिलाओं ने एचआइवी एड्स के बारे में सुना है, जिसमें से 93 फीसदी शहरी क्षेत्र जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 70 फीसदी महिलाएं इस बारे में जानती हैं। विश्व एड्स दिवस हर साल एक दिसंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम क्ववैश्विक एकजुटता साझा जिम्मेदारीÓ है, कोरोना संक्रमण काल में डिजिटल माध्यम का उपयोग करते हुए एड्स जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मीरा बघेल ने बताया कि एचआइवी एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है जिसे मेडिकल भाषा में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस यानि एचआईवी के नाम से जाना जाता है। जबकि लोग इसे आम बोलचाल में एड्स यानि एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम के नाम से भी जानते हैं। इस रोग में जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लडऩे में भी अक्षम होने लगता है।

इस बीमारी का कोई इलाज़ नहीं है, लेकिन जागरुकता से इस बीमारी से बचाव संभव है। डॉ. बघेल ने वल्र्ड एड्स डे के उद्देश्य के बारे में कहा एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली यह बीमारी हर उम्र के लोगों में हो सकती है जागरूकता बढ़ाना ही इसका बचाव है। एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। डॉ. बघेल ने कहा विश्व में प्रत्येक वर्ष एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 1 दिसंबर को वल्र्ड एड्स डे यानि विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरूआत वल्ड हेल्थ आर्गनाईज़ेशन में एड्स की जागरुकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के दो व्यक्तियों ने अगस्त 1987 में की थी। डॉ. बघेल ने बताया शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था जबकि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। साल 1996 में एचआईवी/ एड्स पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके व्यापक प्रचार और प्रसार का काम किया। वर्ष 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर काफी काम किया।

एचआईवी क्या है

एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस हमारे इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। इसके कारण शरीर किसी अन्य रोग के संक्रमण को रोकने की क्षमता खोने लगता है। वहीं एड्स एचआईवी संक्रमण का अगला चरण माना जाता है। शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है।

इन वजहों से होता है एड्स

संक्रमित खून चढ़ाने से, एड्स पॉजिटिव महिला से उसके बच्चे को,एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से संक्रमित रक्त इस्तेमाल करने से एचआईवी/एड्स होने के लक्षण में प्रमुख रूप से बुखार, पसीना आना, ठंड लगना, थकान, भूख कम लगना, वजन घटा, उल्टी आना, गले में खराश रहना, दस्त होना, खांसी होना, सांस लेने में समस्या, शरीर पर चकत्ते होना, स्किन प्रॉब्लम आदि है।

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