कृषि कानूनों को डेढ़ वर्ष के लिए स्थगित करना केंद्र सरकार का राजनीतिक ढोंग: विकास उपाध्याय

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रायपुर (प्रखर)। अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय ने मोदी सरकार द्वारा कृषि सुधार कानूनों के क्रियान्वयन को एक से डेढ वर्ष के लिए स्थगित किये जाने के प्रस्ताव को किसानों के साथ धोखा बताया है। उन्होंने कहा, मोदी सरकार किसानों के साथ आंखमिचौली खेल रही है। वह किसानों के राथ छल कर इसे जितना चाहती है। विकास उपाध्याय ने कहा कि मोदी सरकार तो बस 18 महीने तक इस कानून को स्थगित करना चाह रही है, जिससे इन 18 महीने में कई राज्यों के महत्वपूर्ण चुनाव खत्म हो जाएँगे। इन राज्यों में असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव शामिल है। विकास उपाध्याय ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के परिपेक्ष्य में टिप्पणी कर कहा, नड्डा भाजपा के चड्डा हैं। जिस तरह से चड़ा ढंकने का काम करती है। ठीक उसी तरह नड्डा भाजपा के मोदी सरकार की गलत कार्यकलापों को ढंकने का काम कर देश को गुमराह कर रहे हैं।

भाजपा को अब आम जानता से भय लगने लगा है। यही वजह है कि वह अब छल-कपट पर उतर आई है। किसानों की मूल माँग है, कानून को वापस लेने की और एमएसपी पर कानूनी गारंटी की। ना तो सरकार कानून वापस ले रही है और ना ही एएसपी पर कोई गारंटी दे रही है। ऐसे में केन्द्र सरकार का यह प्रस्ताव किसानों के साथ छलावा के सिवाय और कुछ नहीं है। उन्होंने मोदी की तुलना ट्रम्प से करते हुए कहा तानाशाह करने वाले शासकों का अंत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कि तरह होती है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय आज अपने निवास में पत्रकारों से चर्चा का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि भाजपा की मोदी सरकार देश में अलोकतांत्रिक तरीके से आम जनमानस की मंशा के विपरीत नियम कायदे बना कर उसे छल और कपट के सहारे लागू कर अपना जीत सुनिश्चित करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने बहुमत में होने का हर बार नाजायज फायदा उठाना चाहती है और यह सिर्फ कृषी कानून तक ही सीमित नहीं है। बल्कि एनआरसी और श्रम कानून जैसे मुद्दों पर भी इन 6 वर्षों में सारी सीमाओं को लांघ चुकी है।

विकास उपाध्याय ने कहा कि अब तक जिरा कानून को किसानों के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हितकारी बताते नहीं थक रहे थे। मन की बात से लेकर किसानों को केंद्रीय कृषि मंत्री की चिट्ठी पढ़ने की हिदायत तक दे रहे थे एनडीए के पूर्व सहयोगी अकाली दल तक की उन्होंने परवाह नहीं की, उस पर 12 से 18 महीने तक स्थगित करने के लिए मोदी सरकार का राजी हो जाना, सरकार पर कई सवाल खड़े करता है। विकास उपाध्याय ने कहा मोदी सरकार की यह एक बड़ी चाल है। वह किसानों के साथ आंखमिचौली खेल रही है। किसाना के साथ छल कर रही हैं। दो महीने से किसान सड़कों पर बैठे हैं। कोई हिंसा नहीं हुई, माहौल शांति पूर्ण रहा, दुनिया भर से प्रतिक्रियाएँ आई, इस बीच सुप्रीम कोर्ट का भी तल्ख टिप्पणी आया, आखिर में ट्रैक्टर रैली के आयोजन की बात हो रही है। इससे मोदी सरकार को बात समझ में आ गई कि किसान झुकने वाले नहीं हैं। वह ट्रेक्टर रैली से डर गई है और किसी तरह से झुठ बोल कर 28 जनवरी के पहले किसान आंदोलन को खत्म करना चाहती है।

मोदी सरकार के खिलाफ कोई भी प्रदर्शन इतना बड़ा नहीं था, जैसा किसानों का यह आयोजन है और किसी ने भी अब तक नाराज किसानों की तरह मोदी सरकार को खुलकर चुनौती नहीं दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी को अपने समर्थन पर जरूरत से ज्यादा घमंड है और बड़े आदोलनों को डील करने का उन्हें कोई तजुर्बा नहीं है। यही वजह है कि वह निराधार प्रस्ताव के माध्यम से एक बार पुनः ठगना चाह रही है । औपनिवेशिक भारत में शोषणकारी शासकों के खिलाफ भारतीय किसानों के विरोध प्रदर्शन अक्सर हिंसक हुआ करते थे परन्तु अब की बार किसानों ने आंदोलन का जो रुख अख्तियार किया है वह भारतीय लोकतंत्र में एक नया उदाहरण है।

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