जन्मदिन विशेष कुमार विश्वास  – श्रृंगार रस का एक ऐसा कवि जिनकी कविता सुन प्रेम ना पड़ने वाले लोग भी प्रेम का आभास करने लगते हैं

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कुमार विश्वास देश के जाने माने कवि हैं। हिंदी भाषा को अपने कविता के माध्यम देश – दुनिया कुमार विश्वास ने एक विशेष पहचान दिलाई हैं। इनकी लोकप्रियता देश के साथ विदेशों में भी सिर चढ़कर बोलती हैं। कुमार की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं,कि उनकी एक कविता कोई दीवाना कहता हैं हर वर्ग के लोगो को दिल में एक विशेष जगह बनायी हुयी हैं। जो शायद ही कोई अन्य कवि तोड़ पाए। पाश्चत्य भाषा की ओर आकर्षित हो रहे युवाओं को कुमार विश्वास की कविता की बूटी राह में लाने में कारगार हैं। उऩकी ज्यादातर रचनाए प्रेम पर आधारित होती हैं। इसी  कारण लोग उन्हे श्रृंगार रस का कवि कहकर पुकारते हैं। पहले पहले प्यार में पड़े आशिक से लेकर प्रेमिका के नखरे से परेशान पुराने आशिक की दशा कुमार विश्वास अपनी कविता में इस तरह पिरोते हैं। की प्रेम और प्रेमिका से दूर – दूर तक कोई रिस्ता ना रखने वाला व्यक्ति अपने आप को कुमार विश्वास की कविता में ढूंढने लगता हैं।

यूपी के पिलखुवा में हुआ जन्म

हिंदी के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास का जन्म 10 फऱवरी 1970 में उत्तरप्रदेश के पिलखुवा नाम के जगह में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर चंद्रपाल शर्मा कॉलेज में व्याख्यता थे। उनकी माता रमा शर्मा गृहणी थी। उनके पिता उन्हे इंजीनियर बनाना चाहते थे। जिसके लिए कुमार विश्वास ने कमर भी कस ली और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने लगे। लेकिन उनका मशीनो की पढ़ाई में रमता नही था। जिसेक कारण बीच में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।

हिंदी साहित्य स्नातक और पीएचडी की

कुमार विश्वास इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ हिंदी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई करने लगे। जिसके कारण उनके पिता उनसे काफी नाराज थे। उऩके पिता को क्या पता कि उऩका लाल कुमार आगे चलकर हिंदी का सबसे लोकप्रिय काव्यकार कुमार विश्वास बन जाएगा। कुमार विश्वास ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की जिसमें उन्हें गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ। जिसेक बाद उन्होने कौरवी लोकगीतों मे लोकचेतना विषय में पीएचडी पूरी की। जिसके लिए उन्हें 2001 में पुरस्कृत भी किया गया।

कैरियर

डॉ. कुमार विश्वास ने अपना कैरियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया। तत्पश्वात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही डॉ. विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ. विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वार लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फ़िल्मों में दिखाई पड़ेगी। उन्होंने आदित्य दत्त की फ़िल्म ‘चाय-गरम’ में अभिनय भी किया है।

कार्य एवं उपलब्धियां

विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डॉ. कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई है जिनमें पहला ‘इक पगली लड़की के बिन’ (1996) और दूसरा ‘कोई दीवाना कहता है’ (2007 और 2010 दो संस्करण में) विख्यात लेखक स्वर्गीय धर्मवीर भारती ने डॉ. विश्वास को इस पीढी का सबसे ज़्यादा सम्भावनाओं वाला कवि कहा है।प्रथम श्रेणी के हिन्दी गीतकार ‘नीरज’ जी ने उन्हें ‘निशा-नियामक’ की संज्ञा दी है। मशहूर हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें इस पीढी का एकमात्र आई एस ओ:2006 कवि कहा है।

देश के साथ-साथ विदेशो मे बिखेरा अपने कविता का रस

कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. विश्वास एक अग्रणी कवि हैं। वो अब तक हज़ारों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ और संचालन कर चुके हैं। देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में उनके एकल कार्यक्रम होते रहे हैं। इनमें आई आई टी खड़गपुर, आई आई टी बी एच यू, आई एस एम धनबाद, आई आई टी रूड़की, आई आई टी भुवनेश्वर, आई आई एम लखनऊ,एन आई टी जलंधर,एन आई टी त्रिचि, इत्यादि कई संस्थान शामिल हैं। कई कार्पोरेट कंपनियों में भी डॉ. विश्वास को अक्सर कविता-पाठ के लिए बुलाया जाता है। भारत के सैकड़ों छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें अमेरिका, दुबई , मस्कट, अबू धाबी और नेपाल जैसे देश शामिल हैं।

राजनीतिक जीवन

कुमार विश्वास अगस्त 2011 के दौरान जनलोकपाल आन्दोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे 26  नवम्बर 2012 को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। कुमार विश्‍वास ने अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, परन्‍तु हार गए राजनीति से रूठे कवि कुमार विश्वास कहते हैं “सियासत में मेरा खोया या पाया हो नहीं सकता। सृजन का बीज हूँ मिट्टी में जाया हो नहीं सकता।” उनका कहना है कि ‘राजनीति 10 साल 5 साल लेकिन कविता हजार साल।’

पुरस्कार और सम्मान 

डॉ. कुंवर बेचैन काव्य-सम्मान एवम पुरस्कार समिति द्वारा 1994 में ‘काव्य-कुमार पुरस्कार’

साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा 2004 में ‘डा सुमन अलंकरण’

हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 2006 में ‘साहित्य-श्री’

डॉ॰ उर्मिलेश जन चेतना मंच द्वारा 2010 में ‘डॉ॰ उर्मिलेश गीत-श्री’ सम्मान

कुमार विश्वास के बारे मे कुछ रोचक तथ्य

  • डॉ. कुमार विश्वास हिन्दी मंच के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिनकी कविता (बिना किसी वाद्य यंत्र के, अपने स्वर में) देश के प्राय: सभी बड़े मोबाईल आपरेटरों के कालर बैक ट्यून (काल करने वाले को सुनाई देने वाला ट्यून) में शामिल है।
  • डॉ. विश्वास इंटरनेट पर सबसे लोकप्रिय कवि हैं। आर्कुट और फ़ेसबुक पर उनका प्रशंसक परिवार अन्य किसी भी कवि के प्रशंसक परिवार से बड़ा है।
  • वीडियो वेबसाईट यू-ट्यूब पर डॉ. विश्वास की एक ही वीडियो को पाँच लाख से अधिक बार देखा गया है, जो किसी भी अन्य कवि के वीडियो से कई गुना ज़्यादा है।

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