जल वास्तव में मानव का जीवन है,इसे जन जन तक पहुंचाने के लिए हर वर्ष मनाया जाता अंतरराष्ट्रीय  जल दिवस

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हर साल 22 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय जल दिवस मनाया जाता है। ज्ञात हो कि मनुष्य के जीवन में जल की उतनी ही महत्ता है। जितनी भूखे के लिए भोजन,शिशु के लिए माता और गाड़ी के लिए पेट्रोल डीजल की होती है। पानी के बगैर मानव जीवन की कल्पना नही की जा सकती है। मनुष्य के साथ-साथ इस धरा मे विद्यमान सारी चीजो के लिए जल आवश्यक है। बात चाहे सजीव की हो या निर्जीव की,जल हर चीज के उद्भव से लेकर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज हम 21 वी सदी मे जी रहे है। जहां हर चीज ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। मानव अपनी सुख सुविधा के लिए जंगल काट रहे है। नदी नाले कुआं तालाबो को पाटकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग खड़ा कर रहे है। व्यापार और स्वहित के लिए नदियो को काटकर ब्रीज बनाया जा रहा है। जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जल के स्तर को कम करने और उसे प्रदूषित करने का काम कर रही है। ऐसे में जल को बचाए रखने और संरक्षित करने के उद्देश्य से एक अभियान के रुप में साल में एक दिन अंतरराष्ट्रीय जल दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत हर साल 22 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय जल दिवस मनाया जाता है।

ऐसे हुई थी जल दिवस मनाए जाने की शुरुआत

विश्वभर में 22 मार्च को जल दिवस’ मनाए जाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने ने वर्ष 1992 के अपने एक अधिवेशन में 22 मार्च को इसकी विधिवत् शुरूआत की गई थी। विश्व जल दिवस की अंतरराष्ट्रीय पहल ‘रियो डि जेनेरियो’ ने सऩ् 1992 में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (यूएनसीईडी ) में आयोजित एक ‘पर्यावरण विकास कार्यक्रम में की थी। जिस पर सन् 1993 में पहली बार 22 मार्च को पहल की गई। इस दिन पूरे विश्व में ‘जल दिवस’ के मौके पर “जल संरक्षण और रख-रखाव” विषय पर जागरुकता फैलाने अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

22 मार्च है संकल्प का दिन

’22 मार्च’ यानी कि ‘विश्व जल दिवस’, पानी बचाने के संकल्प का दिन है। यह दिन जल के महत्व को जानने का और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन है। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। प्रकृति इंसान को जीवनदायी संपदा जल एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, इंसान भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है। इस चक्र के थमने का अर्थ है, जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से जितना पानी हम लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते। अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित नहीं होने देना चाहिए और पानी को व्यर्थ होने से भी बचाना चाहिए। 22 मार्च का दिन यह प्रण लेने का दिन है कि हर व्यक्ति को पानी बचाना है।

भारत में जल संकट

यदि हम भारत की बात करें तो देखेंगे कि एक तरफ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर हैं, जहाँ पानी की किल्लत तो है, किंतु फिर भी यहाँ पानी की समस्या विकराल रूप में नहीं है। लेकिन देश के कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जहाँ आज भी कितने ही लोग साफ़ पानी के अभाव में या फिर रोग जनित गन्दे पानी से दम तोड़ रहे हैं। राजस्थान, जैसलमेर और अन्य रेगिस्तानी इलाकों में पानी आदमी की जान से भी ज़्यादा कीमती है। पीने का पानी इन इलाकों में बड़ी कठिनाई से मिलता है। कई-कई किलोमीटर चल कर इन प्रदेशों की महिलाएँ पीने का पानी लाती हैं। इनकी ज़िंदगी का एक अहम समय पानी की जद्दोजहद में ही बीत जाता है।

जल दिवस मनाए जाने का उद्देश्य

विश्व जल दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया को यह बताना है,कि पानी बचाना कितना जरूरी है। ये हमारा मूलभूत संसाधन है, इससे कई काम संचालित होते हैं और इसकी कमी से ज्यातार क्रिया कलाप ठप हो सकते हैं। लोगों को बताना कि पानी के बिना उनके अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।यही इसका मूल उद्देश्य है। जल के बगैर मानव क्या इस संपूर्ण धरा का संचालन नही हो सकता। इस बात  को जन जन तक पहुंचाना जल दिवस का प्रमुख उद्देश्य है।

जल और मानव जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • मुंबई में रोज़ वाहन धोने में ही 50 लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है।
  • दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पाइप लाइनों के वॉल्व की ख़राबी के कारण रोज़ 17 से 44 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है।
  • इज़राइल में औसतन मात्र 10 सेंटीमीटर वर्षा होती है। इस वर्षा से वह इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात कर सकता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटीमीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है।
  • पिछले 50 वर्षों में पानी के लिए 37 भीषण हत्याकांड हुए हैं।
  • भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन 4 मील
  • (लगभग 6.4 कि.मी.) सफ़र पैदल ही तय करती है।
  • जल जनित रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
  • हमारे पृथ्वी ग्रह का 70% से अधिक हिस्सा जल से भरा है, जिस पर एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है। परन्तु, जल की इस विशाल मात्रा में मीठे जल की मात्रा काफ़ी कम है। इसमें से 97.3 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है, शेष 2.7% मीठा जल है। इसका 75.2 फीसदी भाग ध्रुवीय क्षेत्रों में तथा 22.6 फीसदी भूमि जल के रूप में है। इस जल का शेष भाग झीलों, नदियों, कुओं, वायुमंडल में, नमी के रूप में तथा हरे पेड़-पौधों में उपस्थित होता है। इनमें से उपयोग में आने वाला जल का हिस्सा थोड़ा है, जो नदियों, झीलों, तथा भूमि जल के रूप में मौजूद होता है। इस पानी का 60वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है। बाकी का 40वाँ हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं। दुनिया में उपस्थित मीठे जल की एक प्रतिशत मात्रा[1] हमारे सीधे उपयोग के लिए उपलब्ध है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को कहीं भी प्रतिदिन 30 से 50 लीटर स्वच्छ तथा सुरक्षित जल की आवश्यकता होती है और इसके बावजूद 884 मिलियन लोगों को सुरक्षित जल उपलब्ध नहीं है।
  • दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 1,500 घन किलोमीटर गंदे जल का निर्माण होता है। भले ही गंदगी तथा गंदे जल कोऊर्जा तथा सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता हैं, पर ऐसा होता नहीं है। विकासशील देशों में 80 फीसदी कचरों को बिना शुद्ध किये हीं निष्कासित कर दिया जाता है, क्योंकि उनमें इसके लिए कोई नियम तथा संसाधन उपलब्ध नहीं है।
  • यदि ब्रश करते समय नल खुला रह गया है, तो पाँच मिनट में क़रीब 25 से 30 लीटर पानी बरबाद होता है।
  • नहाने के टब में नहाते समय 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि सामान्य रूप से नहाने में 100 से 150 लीटर पानी खर्च होता है।
  • विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है।
  • प्रति वर्ष 3 अरब लीटर बोतल पैक पानी मनुष्य द्वारा पीने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
  • नदियाँ पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। जहाँ एक ओर नदियों में बढ़ते प्रदूषण रोकने के लिए विशेषज्ञ उपाय खोज रहे हैं, वहीं कल कारखानों से बहते हुए रसायन उन्हें भारी मात्रा में दूषित कर रहे हैं। ऐसी अवस्था में जब तक क़ानून में सख्ती नहीं बरती जाती, अधिक से अधिक लोगों को दूषित पानी पीने का समय आ सकता है।
  • पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियाँ से हमें पानी मिलता है।
  • आलू में और अनन्नास में 80 प्रतिशत और टमाटर में 15 प्रतिशत पानी होता है।
  • पीने के लिए मानव को प्रतिदिन 3 लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • एक लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है। एक किलो गेहूँ उगाने के लिए एक हज़ार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए चार हज़ार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।

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