भारत बंद के आह्वान पर दिखा धारा 144 का असर

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रायपुर (प्रखर) । नए कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आज देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया था । जिसके लिए सुबह 6.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी । इन 12 घंटों के दौरान वैकल्पिक रास्ते बंद रखे जाने की बात कही गई थी । लेकिन छत्तीसगढ़ में बंद का असर देखने को नहीं मिला । प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और धाऱा 144 लागू होने कि वजह से किसान संगठनों को पीछे हटना पड़ा । जिसके चलते राजधानी रायपुर में किसान संगठनों की बंद को लेकर कार्यावाहियां बंद रही।

भारत बंद का आह्वान
भारत बंद का आह्वान

वहीं किसान नेता ने बताया कि कोरबा, धमतरी, सरगुजा और राजनांदगांव समेत कई जिलों में बंद का असर काफी हद तक सफल रहा। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
लेकिन राजधानी रायपुर में इस पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। मुख्य बाजारों में कई व्यापारियों ने बंद को सार्थक बनाने के लिए अपनी दुकान बंद रखा । वहीं कई व्यापारियों ने बंद के आह्वान को अनसुना करते हुए सुबह से ही दुकाने खोल ली थी ।

इन जिलों में दिखा बंद असर

किसान नेता संजय पराते ने बताया कि केंद्र के द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों का अलग –अलग प्रदेशों में अलग – अलग प्रभाव है । इसलिए आंदोलन की तीव्रता एक समान नहीं है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की सरकार दो तिहाई धान खरीद लेती है इसलिए किसानों को पता ही नहीं है कि मंडियां बंद होने से उन्हें क्या नुकसान होगा। लेकिन जहां तक किसानों को इस कानून से होने वाले परेशानी को समझाने में सफल है, वहां के किसान मैदान में उतर कर इसका विरोध कर रहे हैं ।

आने वाले समय में मजबूती से किया जाएगा समर्थन

किसान नेता नेतराम विद्रोही ने बताया कि उनकी ओर से बंद के लिए पूरा तैयारी किया गया था, लेकिन गुरूवार रात से धारा 144 प्रभावी होने और संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से भी कहा गया था कि जहां भी कार्यक्रम किया जाएगा वहां शांति पूर्ण तरीके से किया जाएगा। इस चलते संगठनों को समर्थन के लिए सामान्य आह्वान दिया गया था। लेकिन जितना समर्थन मिलना था उतना नहीं मिला पाया। वहीं उन्होंने बताया कि आंदोलन अभी जारी है और आगे जो भी कार्यक्रम बनाया जाएगा उसमें पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया जाएगा । उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थिति में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए छत्तीसगढ़ का टेंट सिंधु बॉर्डर लगाया गया है । इसके अलावा आने वाले समय में किसान आंदोलन को मजबूती प्रदान करने के लिए किसानों का जत्था कूच करेंगे । इस दौरान कोविड -19 के गाइडलाइनों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा ।

गौरतलब हो कि मोर्चे ने अपने एक बयान में कहा था कि ‘संपूर्ण भारत बंद के तहत सभी दुकानें, मॉल, बाजार और संस्थान बंद रहेंगे सभी छोटे और बड़े मार्ग अवरुद्ध किए जाएंगे तथा ट्रेनों को रोका जाएगा एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद रहेगी’ । आंदोलनकारी किसानों से अपील किया गया था कि बंद के दौरान शांति बनाए रखें और किसी भी गलत चर्चा या टकराव में शामिल ना हो। किसान आंदोलन के 4 महीने पूरे होने पर भारत बंद का एलान किया गया है। किसानों की ओर से प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की गई है। किसानों के भारत बंद को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने कई स्टेशन को बंद रखा गया। वहीं रेल्वे से मिली जानकारी के अनुसार छ्त्तीसगढ़ में इस तरह की कोई तस्वीर देखने को नहीं मिली । पटरियों पर ट्रेन पहले की तरह ही दौड़ती नजर आई ।

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