पुण्यतिथि विशेष – भारतीय राजनीति के दबंग राजनेता थे चौधरी देवी लाल जिन्हे प्यार से लोग ताऊ कहते थे

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मिजाज से अक्खड़ और दबंग माने जाने वाले ताऊ देवीलाल की गिनती उन चुनिंदा नेताओं में होती है, जो देश को आजादी मिलने से पहले और बाद में राजनीति में सक्रिय तौर से शामिल रहे। हरियाणा से सीएम और देश के उपप्रधानमंत्री रहे देवीलाल भारतीय राजनीति में किंगमेकर की भूमिका में भी रहे।चौधरी देवी लाल भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं भारतीय राजनीति के पुरोधा पुरुष माने जाते थे। उन्हें किसानों के मसीहा, महान् स्वतंत्रता सेनानी, हरियाणा के जन्मदाता, राष्ट्रीय राजनीति के भीष्म-पितामह, करोड़ों भारतीयों के जननायक कहकर भी पुकारा जाता था। आज भी चौधरी देवी लाल का महज नाम-मात्र लेने से ही, हज़ारों की संख्या में बुजुर्ग एवं नौजवान उद्वेलित हो उठते हैं। उन्होंने आजीवन किसान, मुजारों, मज़दूरों, ग़रीब एवं सर्वहारा वर्ग के लोगों के लिए लड़ाई लड़ी और कभी भी पराजित नहीं हुए। आज उनका क़द भारतीय राजनीति में बहुत ऊंचा है। उन्हें लोग भारतीय राजनीति के अपराजित नायक के रूप में जानते हैं। उन्होंने भारतीय राजनीतिज्ञों के सामने अपना जो चरित्र रखा वह वर्तमान दौर में बहुत प्रासंगिक है।

पंजाब के सिरसा मे हुआ जन्म

भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष चौधरी देवी लाल का जन्म 25 सितंबर, 1914 को पंजाब के सिरसा ज़िले में हुआ था। उनके पिता का नाम चौधरी लेखराम, माँ का नाम शुंगा देवी और पत्नी का नाम श्रीमती हरखी देवी था। बाल्याकाल से ही उनके व्यक्तित्व में अलग प्रकार का आकर्षण था। जो समय के साथ बढ़ता चला गया। खराब स्वास्थय के चलते 6 अप्रैल सन् 2001 को उनका निधन हो गया।

राजनीतिक जीवन

चौधरी देवीलाल में बचपन से ही संघर्ष का मादा कूट-कूट भरा हुआ था। परिणामत: बचपन में उन्होंने जहाँ अपने स्कूली जीवन में मुजारों के बच्चों के साथ रहकर नायक की भूमिका निभाई। इसके साथ ही महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, भगत सिंह के जीवन से प्रेरित होकर भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर राष्ट्रीय सोच का परिचय दिया। 1962 से 1966 तक हरियाणा को पंजाब से अलग राज्य बनवाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने सन् 1977 से 1979 तथा 1987 से 1989 तक हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से पूरे देश को एक नई राह दिखाई। इन्हीं नीतियों को बाद में अन्य राज्यों व केन्द्र ने भी अपनाया। इसी प्रकार केन्द्र में प्रधानमंत्री के पद को ठुकरा कर भारतीय राजनीतिक इतिहास में त्याग का नया आयाम स्थापित किया। वे ताउम्र देश एवं जनता की सेवा करते रहे और किसानों के मसीहा के रूप में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

हरियाणा निर्माता

संयुक्त पंजाब के समय वर्तमान हरियाणा जो उस समय पंजाब का ही हिस्सा था, विकास के मामले में भारी भेदभाव हो रहा था। उन्होंने इस भेदभाव को न सिर्फ पार्टी मंच पर निरंतर उठाया बल्कि विधानसभा में भी आंकड़ों सहित यह बात रखीं और हरियाणा को अलग राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया। जिसके परिणामस्वरूप 1 नवम्बर, 1966 को अलग हरियाणा राज्य अस्तित्व में आया और प्रदेश के निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले चौधरी देवीलाल को हरियाणा निर्माता के तौर पर जाना जाने लगा।

ज़ुबान के पक्के थे देवीलाल

चौधरी देवीलाल के प्रपौत्र और हिसार से लोकसभा सदस्य दुष्यंत चौटाला बताते हैं, “संसद में अभी भी कम से कम 50 ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने चौधरी देवीलाल के साथ काम किया है, उनसे बात होती तो ये लोग बताते हैं कि 1989 में इन लोगों का मुंह खुला का खुला रह गया था। जब देवीलाल ने विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपनी जगह नेता बनाया था। हालांकि लोग इस बात की भी प्रशंसा करते हैं कि देवीलाल अपनी जुबान के पक्के थे। उन्होंने जो किया था वो कोई आम बात तो नहीं ही थी।

देश की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका

महात्मा गांधी के आह्वान पर देश की आजादी की लड़ाई में कूदे देवीलाल ने लाला लाजपत राय के साथ प्रदर्शनों में भी कंधे से कंधा मिलाया। 1952 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने देवीलाल का इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस से मोहभंग हो गया था। वह जनता पार्टी में शामिल हो गए। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक सत्ता के गलियारों में उनकी बनी रही। खासतौर से 1987 से लेकर 1991 तक भारतीय राजनीति में वह किंगमेकर की भूमिका में रहे।

कुछ ऐसा रहा व्यक्तित्व

चौधरी देवी लाल अक्सर कहा करते थे कि भारत के विकास का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है, जब तक ग़रीब किसान, मज़दूर इस देश में सम्पन्न नहीं होगातब तक इस देश की उन्नति के कोई मायने नहीं हैं। इसलिए वो अक्सर यह दोहराया करते थे- हर खेत को पानी, हर हाथ को काम, हर तन पे कपड़ा, हर सिर पे मकान, हर पेट में रोटी, बाकी बात खोटी। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए चौ. देवीलाल जीवन पर्यंत संघर्ष करते रहे। उनकी सोच थी कि सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं, अपितु जन सेवा के लिए होती है। चौ. देवीलाल के संघर्षमय जीवन की तस्वीर आज भारतीय जन-मानस के पटल पर साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राजनीति के इतिहास में चौ. देवीलाल जैसे संघर्षशील नेता का मादा किसी अन्य राजनीतिक नेता में दिखलाई नहीं पड़ता। वर्तमान समय में जन मानस के पटल पर चौ. देवीलाल के संघर्षमय जीवन की जो तस्वीर अंकित है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करती रहेगी। चौ. देवीलाल आज हमारे मध्य नहीं हैं, लेकिन उनका बुजुर्गाना अंदाज, मीठी झिड़कियां सही रास्ते की विचारधारा की सीख के रूप में जो कुछ वो देकर गए हैं, वह सदैव हमारे बीच रहेगा। चौ. देवीलाल अपने स्वभावनुसार पूरे ठाठ के साथ, झुझारूपन एवं अनोखी दबंग अस्मिता के साथ जीये। आज अपनी मिट्टी से जुड़े तन-मन के दिलो-दिमाग पर राज करने वाले देवीलाल जैसे जननायक ढूंढने से भी नहीं मिल सकते। जनहित के कार्यों के रूप में स्व. देवीलाल जन-जन के अंत: पटल पर जो कुछ अंकित कर गए हैं, वो लम्बे समय तक उनकी याद जो ताजा कराता रहेगा। जन-मानस बर्बस स्मरण करता रहेगा कि हरियाणा की पुण्य भूमि ने ऐसे नर- केसरी को जन्म दिया था, जिसने अपने त्याग, संघर्ष और जुझारूपन से परिवार के मुखिया ताऊ के दर्जे को, राष्ट्रीय ताऊ के सम्मानजनक एवं श्रद्धापूर्ण पद के रूप में अलंकृत किया।

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